बच्चों की कहानियां | Baccho Ki Kahaniya | Stories For Kids in Hindi

कहानियां बच्चों को ही नहीं बल्कि बड़ों को भी बहुत भाती हैं। जब भी कोई कहानी पढ़ता है या सुनता है, उसे अपने बचपन की याद जरूर आती है। क्यूंकि अक्सर हम सभी ने अपने बचपन में अपने बड़ों से कहानी जरूर सुनी हुई होती है। इसलिए हम आज आपके लिये बच्चों की कहानियां (Baccho Ki Kahaniya) यानी Stories For Kids हिंदी में लेकर आये हैं, जिनको आपको जरूर अंत तक पढ़ना चाहिए। तो आइये शुरु करते हैं।

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बच्चों की कहानियां (Baccho Ki Kahaniya | Stories For Kids in Hindi)

आज का समय Youtube और मोबाइल का है, लेकिन बच्चे अभी भी कहानी को पसंद करते हैं। पहले कहानियां किताबों तक सीमित थी। लेकिन अब Technology के माध्यम से बच्चे अभी भी इन से जुड़े हैं। पहले जब कहानी को सुनने में हम सभी अपनी कल्पनाओं में चले जाते थे। और बड़े ही रोचक मन से कहानी के अंत तक सुनते रहते थे।

हर कहानी में एक बात जरूर अच्छी होती थी, कि उनमें कोई ना कोई शिक्षा होती थी। जिससे हम सभी अपने जीवन में गलत और सही की समझ को बढ़ती थी। कहानी का मूल हमें एक अच्छा इंसान बनाना था। और वह आज भी है।

लक्ष्य (Hindi Story)

एक बार की बात है, एक जंगल में एक छोटा सा खरगोश रहता था। उसका नाम लक्ष्य था। लक्ष्य बहुत ही मेहनती और दृढ़निश्चयी खरगोश था। वह हमेशा अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत करता था।

एक दिन, लक्ष्य जंगल में घूम रहा था। तभी उसे एक बड़ा सा सेब का पेड़ दिखाई दिया। लक्ष्य को बहुत ही भूख लगी थी, इसलिए उसने सेब के पेड़ पर चढ़ने का फैसला किया।

लेकिन सेब का पेड़ बहुत ऊँचा था। लक्ष्य ने बहुत कोशिश की, लेकिन वह सेब के पेड़ पर नहीं चढ़ पाया। लक्ष्य निराश हो गया, लेकिन उसने हार नहीं मानी।

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लक्ष्य ने सोचा कि अगर वह सेब के पेड़ पर नहीं चढ़ पाया, तो वह सेब नहीं खा पाएगा। लेकिन लक्ष्य सेब खाना चाहता था। इसलिए उसने फिर से कोशिश की।

लक्ष्य ने बहुत मेहनत की और आखिरकार वह सेब के पेड़ पर चढ़ने में कामयाब हो गया। लक्ष्य ने सेब खाया और बहुत खुश हुआ।

लक्ष्य की कहानी हमें सिखाती है कि अगर हम मेहनत करें और अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए दृढ़ निश्चयी रहें, तो हम कुछ भी हासिल कर सकते हैं।

Moral of the Story:- यदि हम कड़ी मेहनत करते हैं और अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं, तो हम कुछ भी हासिल कर सकते हैं।

खरगोश और उसके दोस्त (Hindi Story)

एक बार की बात है, एक जंगल में एक खरगोश रहता था। वह बहुत ही भोला और सीधा था। एक दिन, खरगोश जंगल में घूम रहा था, तभी उसे एक लोमड़ी दिखाई दी। लोमड़ी बहुत ही चालाक और धूर्त थी। वह खरगोश को देखकर खुश हो गई और उससे कहा, “ओह, तुम बहुत ही प्यारे लग रहे हो। क्या तुम मेरे दोस्त बनोगे?”

खरगोश को लोमड़ी से दोस्ती करने में कोई बुराई नहीं लगी और वह मान गया। लोमड़ी और खरगोश अच्छे दोस्त बन गए। वे दोनों अक्सर साथ में खेलते और घूमते थे।

एक दिन, लोमड़ी ने खरगोश से कहा, “चलो, आज हम एक खेल खेलते हैं। मैं तुम्हें एक दौड़ लगाने के लिए चुनौती देता हूं।”

खरगोश ने सोचा कि यह एक अच्छा खेल होगा और वह मान गया। लोमड़ी और खरगोश दौड़ने लगे। लोमड़ी बहुत तेज दौड़ती थी, लेकिन खरगोश बहुत ही भोला था और वह लोमड़ी से नहीं जीत पाया।

खरगोश बहुत निराश हुआ, लेकिन लोमड़ी ने उसे सांत्वना दी और कहा, “तुम बहुत ही भोले हो, लेकिन तुम एक अच्छे दोस्त हो। मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूं।”

खरगोश को लोमड़ी के शब्दों से खुशी हुई और वह फिर से लोमड़ी का दोस्त बन गया। वे दोनों फिर से अच्छे से खेलने और घूमने लगे।

Moral of the Story:- इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि हमें हमेशा सतर्क रहना चाहिए और किसी से भी जल्दी दोस्ती नहीं करनी चाहिए। हमें उन लोगों से दोस्ती करनी चाहिए जो हमारे लिए अच्छे हैं और हमें कभी भी धोखा नहीं देंगे।

शीतल और उसका जादुई पाउडर (Hindi Story)

शीतल एक छोटी सी लड़की थी जो बहुत ही चंचल और जिज्ञासु थी। उसे हर चीज के बारे में जानने की इच्छा थी। एक दिन, वह एक जादुई पाउडर की खोज करती है जो उसे कुछ भी करने की शक्ति देता है।

शीतल सबसे पहले पाउडर का इस्तेमाल एक गुब्बारे को फुलाने के लिए करती है। गुब्बारा इतना बड़ा हो जाता है कि वह आसमान में उड़ जाता है। शीतल बहुत खुश होती है और वह सोचती है कि वह पाउडर का इस्तेमाल और भी कई चीजों के लिए कर सकती है।

अगले दिन, शीतल पाउडर का इस्तेमाल एक नई कार बनाने के लिए करती है। कार बहुत ही सुंदर और तेज थी। शीतल कार से बहुत खुश थी और वह कार में बैठकर घूमने के लिए निकल पड़ी।

शीतल ने पाउडर का इस्तेमाल और भी कई चीजों के लिए किया। उसने एक नई इमारत बनाई, एक नदी का बहाव रोक दिया, और यहां तक ​​कि एक तूफान को भी शांत कर दिया। शीतल बहुत खुश थी कि उसके पास जादुई पाउडर था और वह कुछ भी कर सकती थी।

लेकिन एक दिन, शीतल को एहसास हुआ कि पाउडर की शक्तियां बहुत बड़ी हो गई हैं। वह अब पाउडर का इस्तेमाल अच्छे के लिए नहीं कर पा रही थी। वह पाउडर को खत्म करने का फैसला करती है।

शीतल पाउडर को एक सूटकेस में रखती है और सूटकेस को एक दूर के द्वीप पर फेंक देती है। शीतल को पता है कि वह अब पाउडर को कभी नहीं पा पाएगी, लेकिन वह खुश है कि उसने इसे खत्म कर दिया है।

शीतल की कहानी हमें सिखाती है कि शक्ति हमेशा अच्छी नहीं होती है। अगर हम शक्ति का गलत इस्तेमाल करते हैं, तो हम नुकसान भी कर सकते हैं। शीतल ने जादुई पाउडर का इस्तेमाल अच्छे के लिए किया, लेकिन जब वह शक्ति को संभाल नहीं सकी तो उसने इसे खत्म कर दिया।

इस कहानी से हमें यह भी सीख मिलती है कि हमें हमेशा अपनी शक्तियों का दुरुपयोग नहीं करना चाहिए। हमें अपनी शक्तियों को अच्छे के लिए इस्तेमाल करना चाहिए और दूसरों की मदद करनी चाहिए।

Moral of the Story:- शक्ति हमेशा अच्छी नहीं होती। हमें अपनी शक्तियों का दुरुपयोग नहीं करना चाहिए। हमें अपनी शक्तियों का उपयोग भलाई के लिए करना चाहिए और दूसरों की मदद करनी चाहिए।

छोटा खरगोश और बुद्धिमान साँप (Hindi Story)

एक छोटा खरगोश जंगल में रहता था। वह बहुत ही भोला और मासूम था। एक दिन, वह जंगल में घूम रहा था, तभी उसे एक बुद्धिमान साँप मिला। साँप ने खरगोश को देखा और उसे खाने का विचार आया।

साँप ने खरगोश से कहा, “हे खरगोश, तुम बहुत ही सुंदर और स्वादिष्ट लगते हो। क्या तुम मेरे साथ चलना चाहोगे?”

खरगोश को साँप की बात सुनकर डर लगा, लेकिन वह बहुत ही भोला था और साँप को नहीं पहचान पाया। वह साँप के साथ चलने के लिए तैयार हो गया।

साँप और खरगोश जंगल में बहुत दूर चले गए। जब वे एक सुनसान जगह पर पहुँचे, तो साँप ने खरगोश को खाने की कोशिश की।

खरगोश ने साँप को देखते ही समझ गया कि वह उसे धोखा दे रहा था। वह साँप से दूर भागने लगा। साँप ने खरगोश का पीछा किया, लेकिन खरगोश बहुत ही तेज़ था और साँप उसे नहीं पकड़ पाया।

खरगोश भागते-भागते एक पेड़ पर चढ़ गया। साँप पेड़ पर नहीं चढ़ सकता था, इसलिए वह खरगोश को नहीं पकड़ पाया।

खरगोश ने साँप को कहा, “तुम मुझे नहीं पकड़ सकते, क्योंकि मैं बहुत ही तेज़ और चतुर हूँ। अब तुम जाओ, और मुझे और मत तंग करो।”

साँप को बहुत गुस्सा आया, लेकिन वह खरगोश को नहीं पकड़ पाया। वह जंगल में से चला गया।

खरगोश ने साँप को धोखा देकर अपनी जान बचाई। वह बहुत ही खुश था कि वह साँप से बच गया था। वह समझ गया था कि वह अब से किसी भी अजनबी के साथ नहीं जाएगा।

Moral of the Story:- अजनबियों से सावधान रहें। किसी ऐसे व्यक्ति पर भरोसा न करें जिसे आप नहीं जानते।

चींटी और कबूतर (The Ant and the Dove Hindi Story)

चींटी और कबूतर कहानी एक प्रसिद्ध कहानी है जो बच्चों को अच्छे और बुरे के बीच के अंतर को सिखाती है. यह कहानी हमें सिखाती है कि हमें दूसरों के साथ दयालु और मददगार होना चाहिए, भले ही वे हमारे दोस्त न हों.

एक दिन, एक चींटी भोजन इकट्ठा कर रही थी जब वह अचानक एक नदी में गिर गई. चींटी तैर नहीं सकती थी, और वह डूबने लगी. तभी एक कबूतर ने चींटी को देखा. कबूतर ने एक पत्ते को अपने मुंह में लिया और चींटी को पत्ते पर रख दिया. फिर, कबूतर ने पत्ते को पानी में फेंक दिया और चींटी को किनारे पर ले आया.

चींटी को बचाने के लिए कबूतर ने अपनी जान जोखिम में डाली थी. चींटी कबूतर का बहुत आभारी था. उसने कबूतर से कहा, “तुमने मेरी जान बचाई. मैं तुम्हारा कभी भी शुक्रगुजार नहीं रहूंगी.”

कबूतर ने कहा, “यह मेरा सौभाग्य था कि मैं तुम्हारी मदद कर सकी. हमें हमेशा दूसरों के साथ दयालु और मददगार होना चाहिए.”

चींटी और कबूतर ने एक-दूसरे के साथ दोस्ती कर ली. वे दोनों ने सीखा कि हमें हमेशा दूसरों के साथ दयालु और मददगार होना चाहिए.

कहानी की नैतिक शिक्षा यह है कि हमें हमेशा दूसरों के साथ दयालु और मददगार होना चाहिए, भले ही वे हमारे दोस्त न हों. अगर हम दूसरों की मदद करते हैं, तो वे भी हमारी मदद करेंगे. इस तरह, दुनिया एक बेहतर जगह बन जाएगी.

भेड़िया और सारस (The Wolf and the Crane Hindi Story)

एक बार एक भेड़िया था जो बहुत भूखा था. वह जंगल में घूम रहा था कि उसे एक सारस दिखाई दिया. सारस एक लंबी चोंच वाला पक्षी था जो पानी में मछली पकड़ता था.

भेड़िया ने सारस से कहा, “मैं बहुत भूखा हूँ. क्या तुम मुझे कुछ खाने के लिए दे सकती हो?”

सारस ने कहा, “मैं तुम्हें कुछ खाने के लिए दे दूंगी, लेकिन तुम मुझे एक शर्त रखनी होगी.”

भेड़िया ने कहा, “ठीक है, मैं तुम्हारी कोई भी शर्त मानने को तैयार हूँ.”

सारस ने कहा, “तुम्हें मेरे गले में फंसी हुई हड्डी को निकालना होगा.”

भेड़िया को यह शर्त बहुत अजीब लगी, लेकिन वह भूखा था इसलिए उसने हाँ कर दी.

सारस ने अपना सिर भेड़िये के मुंह में डाल दिया और हड्डी को निकालना शुरू कर दिया. हड्डी बहुत बड़ी थी और निकालने में बहुत मुश्किल हो रही थी. लेकिन सारस ने हिम्मत नहीं हारी और आखिरकार उसने हड्डी को निकाल दिया.

भेड़िया ने सारस को धन्यवाद दिया और चला गया. लेकिन वह सारस को धोखा देने के बारे में नहीं सोचा.

कुछ दिनों बाद, सारस भेड़िये के पास गया और उससे कहा, “तुमने मुझे एक शर्त रखी थी और मैंने तुम्हारी शर्त पूरी की. अब तुम मुझे अपना वादा पूरा करो.”

भेड़िया ने कहा, “तुमने मेरे लिए एक बहुत ही छोटी सी बात की है. मैं तुम्हें कोई इनाम नहीं दूंगा.”

सारस को बहुत दुख हुआ, लेकिन उसने कुछ नहीं कहा. वह चुपचाप वहाँ से चली गई.

भेड़िये को बहुत पछतावा हुआ कि उसने सारस को धोखा दिया था. लेकिन अब बहुत देर हो चुकी थी. सारस उसे कभी माफ़ नहीं करेगी.

Moral of the Story:- जो लोग दूसरों की मदद करते हैं, उन्हें धोखा नहीं देना चाहिए. धोखा देने वाले लोग कभी भी सुखी नहीं हो सकते.

लकड़ी का बटुआ (The Wooden Purse Hindi Story)

एक समय की बात है, एक गरीब किसान था जो अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ रहता था. वह बहुत मेहनती था, लेकिन वह कभी भी बहुत पैसा नहीं कमा पाता था. एक दिन, किसान जंगल में काम कर रहा था जब उसने एक लकड़ी का बटुआ देखा. बटुआ जमीन पर पड़ा था और यह बहुत सुंदर था.

किसान ने बटुआ उठाया और उसे खोला. बटुए में सोने के सिक्के भरे हुए थे! किसान बहुत खुश हुआ. उसने सोने के सिक्के अपने घर ले गए और अपनी पत्नी को दिखाए. पत्नी भी बहुत खुश हुई. उसने सोने के सिक्कों से एक नया घर बनवाया और अपने बच्चों को अच्छी तरह से पढ़ाया-लिखाया. किसान और उसकी पत्नी अब बहुत खुश थे.

एक दिन, एक व्यापारी किसान के गांव आया. व्यापारी बहुत अमीर था और उसने एक बहुत ही सुंदर घोड़ा खरीदा. किसान ने व्यापारी से घोड़े के बारे में पूछा और व्यापारी ने उसे बताया कि घोड़ा बहुत महंगा है. किसान बहुत दुखी हुआ. उसने सोचा कि वह कभी भी घोड़ा नहीं खरीद पाएगा.

लेकिन फिर, उसने लकड़ी के बटुए के बारे में याद किया. उसने बटुआ खोला और सोने के सिक्के निकाले. किसान ने सोने के सिक्कों से घोड़ा खरीद लिया. किसान अब बहुत खुश था. उसके पास एक नया घर, अच्छी तरह से पढ़े-लिखे बच्चे और एक सुंदर घोड़ा था.

किसान ने कई सालों तक घोड़े को बहुत प्यार से पाला. घोड़ा भी किसान से बहुत प्यार करता था. एक दिन, किसान और घोड़ा जंगल में काम कर रहे थे जब एक जंगली जानवर ने किसान पर हमला किया. घोड़ा किसान की रक्षा के लिए आगे आया और जानवर से लड़ाई लड़ी. घोड़ा जानवर को हरा दिया, लेकिन वह खुद गंभीर रूप से घायल हो गया।

किसान बहुत दुखी मन से घोड़े को इलाज के लिए शहर चला गया। डॉक्टर ने घोड़े का इलाज किया, लेकिन घोड़ा मर गया. किसान बहुत दुखी हुआ. उसने घोड़े को दफना दिया और उसने घोड़े की समाधि के उपर एक फूल का पौधा लगाया।

किसान अब बहुत अकेला था. उसके पास कोई नहीं था. लेकिन फिर, उसने लकड़ी के बटुए के बारे में याद किया. उसने बटुआ खोला और सोने के सिक्के निकाले. किसान ने सोने के सिक्कों से एक स्कूल बनवाया. किसान ने स्कूल में गरीब बच्चों को पढ़ाया-लिखाया. किसान अब बहुत खुश था. वह जानता था कि घोड़ा भी उसके काम से खुश होगा।

बुद्धिमान बंदर (The Wise Monkey Hindi Story)

एक समय की बात है, एक बुद्धिमान बंदर रहता था. वह जंगल के सबसे बुद्धिमान जानवरों में से एक था. वह पेड़ों पर चढ़ना और फल खाना पसंद करता था. एक दिन, बंदर एक पेड़ पर बैठा था और फल खा रहा था. तभी, एक बाघ आया. बाघ ने बंदर को देखा और उसे खाने के लिए तैयार हो गया. बंदर बहुत डर गया, लेकिन वह बहुत बुद्धिमान भी था. उसने सोचा कि कैसे वह बाघ से बच सकता है।

बंदर ने एक तरकीब सोची. उसने बाघ से कहा, “बाघ, तुम बहुत शक्तिशाली हो. मैं तुम्हारा सामना नहीं कर सकता. लेकिन मैं तुम्हें एक ऐसा फल बता सकता हूं जो तुम्हारे लिए बहुत स्वादिष्ट होगा. वह फल इस पेड़ पर नहीं है, लेकिन इस जंगल के दूसरे छोर पर है. अगर तुम मुझे वहां ले जाओगे, तो मैं तुम्हें वह फल दिखा दूंगा.”

बाघ को यह बात सुनकर अच्छा लगा. वह जानता था कि बंदर बहुत बुद्धिमान है, इसलिए उसने बंदर की बात मान ली. बाघ ने बंदर को अपनी पीठ पर बैठाया और उसे दूसरे छोर के जंगल ले गया. जब वे दूसरे छोर पर पहुंचे, तो बंदर ने बाघ से कहा, “वहां देखो, वह फल है.”

बाघ ने देखा कि बंदर ने जो फल दिखाया था, वह एक बहुत ही स्वादिष्ट फल था. बाघ ने उस फल को खा लिया और उसे बहुत स्वादिष्ट लगा. बाघ ने बंदर से कहा, “धन्यवाद, बंदर. तुमने मुझे बहुत स्वादिष्ट फल दिया.”

बाघ ने बंदर को छोड़ दिया और चला गया. बंदर बहुत खुश था. उसने बाघ से अपना जीवन बचा लिया था।

बंदर की कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि बुद्धिमत्ता बहुत शक्तिशाली होती है. अगर हम बुद्धिमान हैं, तो हम किसी भी कठिन परिस्थिति से बच सकते हैं।

राजा और भिक्षु (The King and the Monk Hindi Story)

एक बार एक राजा था जो बहुत ही धनवान और शक्तिशाली था। वह अपने राज्य में सब कुछ नियंत्रित करता था। एक दिन, राजा ने एक भिक्षु को देखा जो बहुत ही गरीब था। भिक्षु को देखकर राजा को बहुत ही बुरा लगा। उसने सोचा कि वह भिक्षु को धन और शक्ति देकर उसकी मदद कर सकता है।

राजा ने भिक्षु को अपने महल में बुलाया और कहा, “मैं तुम्हें धन और शक्ति दूंगा। तुम मेरे राज्य में रहोगे और तुम मेरे सबसे अच्छे दोस्त बनोगे।”

भिक्षु ने कहा, “धन और शक्ति की मुझे कोई आवश्यकता नहीं है। मैं अपने जीवन में केवल शांति और ज्ञान चाहता हूं।”

राजा को भिक्षु की बात समझ में नहीं आई। उसने कहा, “तुम क्या मतलब हो?”

भिक्षु ने कहा, “मैं कह रहा हूं कि मैं धन और शक्ति से खुश नहीं होऊंगा। मैं केवल शांति और ज्ञान से खुश होऊंगा।”

राजा को बहुत ही गुस्सा आया। उसने कहा, “तुम एक मूर्ख हो! तुम नहीं जानते कि धन और शक्ति क्या है। वे ही चीजें हैं जो तुम्हें खुश कर सकती हैं।”

भिक्षु ने कहा, “मैं नहीं मानता। मैं कहता हूं कि शांति और ज्ञान ही चीजें हैं जो तुम्हें खुश कर सकती हैं।”

राजा और भिक्षु के बीच एक लंबी बहस हुई। अंत में, राजा ने भिक्षु को छोड़ दिया। राजा को अभी भी भिक्षु की बात समझ में नहीं आई थी, लेकिन वह जानता था कि भिक्षु एक बुद्धिमान व्यक्ति था।

उस दिन के बाद, राजा ने भिक्षु के बारे में बहुत सोचा। वह सोचता था कि भिक्षु क्या सही कह रहा था। क्या धन और शक्ति वास्तव में खुशी नहीं लाते हैं? क्या शांति और ज्ञान ही वास्तव में महत्वपूर्ण हैं?

अंत में, राजा ने फैसला किया कि वह भिक्षु के विचारों पर ध्यान देगा। वह अपने जीवन में शांति और ज्ञान की तलाश करेगा।

राजा ने अपने महल को छोड़ दिया और एक भिक्षु बन गया। वह एकांत में रहने लगा और ध्यान करने लगा। वह शांति और ज्ञान की खोज में था।

कई सालों बाद, राजा ने शांति और ज्ञान पा लिया। वह एक बहुत ही खुश व्यक्ति बन गया। वह जानता था कि धन और शक्ति वास्तव में खुशी नहीं लाते हैं। शांति और ज्ञान ही वास्तव में महत्वपूर्ण हैं।

Moral of the Story:- पैसा और ताकत ही एकमात्र ऐसी चीजें नहीं हैं जो खुशी लाती हैं। शांति और ज्ञान भी महत्वपूर्ण हैं।

शीतल और मधुर (Hindi Story)

शीतल और मधुर दो दोस्त थे। वे एक ही स्कूल में पढ़ते थे और एक ही मोहल्ले में रहते थे। वे दोनों बहुत ही अच्छे दोस्त थे और हर समय एक साथ रहते थे। वे एक दूसरे के साथ खेलते थे, एक दूसरे के साथ पढ़ते थे और एक दूसरे के साथ हर चीज करते थे।

एक दिन, शीतल और मधुर खेलते-खेलते एक पेड़ के नीचे बैठे थे। तभी शीतल ने एक सुंदर फूल देखा। उसने फूल को तोड़ना चाहा, लेकिन मधुर ने उसे रोक दिया।

मधुर ने कहा, “शीतल, फूल को मत तोड़ो। यह बहुत ही सुंदर है और यह पेड़ को बहुत सुंदर बनाता है। अगर तुम इसे तोड़ोगे तो पेड़ बहुत ही उदास हो जाएगा।”

शीतल ने मधुर की बात मान ली और फूल को नहीं तोड़ा। वे दोनों पेड़ के नीचे बैठे रहे और पेड़ को देखते रहे।

थोड़ी देर बाद, एक छोटा सा पक्षी पेड़ पर बैठ गया। पक्षी ने फूल को देखा और उसे बहुत ही पसंद आया। पक्षी ने फूल को उठाया और अपने बिल में ले गया।

शीतल और मधुर ने पक्षी को फूल ले जाते हुए देखा और वे बहुत ही खुश हुए। वे समझ गए कि मधुर सही था। फूल को तोड़ने से अच्छा था कि इसे पक्षी को दे दिया जाए।

शीतल और मधुर ने उस दिन बहुत कुछ सीखा। उन्होंने सीखा कि प्रकृति की चीजों को नहीं तोड़ना चाहिए। उन्होंने यह भी सीखा कि दूसरों को खुश करना भी अच्छा होता है।

Moral of the Story:- हमें प्रकृति को नष्ट नहीं करना चाहिए. दूसरों को खुश करना अच्छी बात है।

चालाक लोमड़ी और मूर्ख बकरी (The Cunning Fox and the Foolish Goat Hindi Story)

एक बार की बात है, एक जंगल में एक चालाक लोमड़ी रहती थी. वह हमेशा भोजन की तलाश में रहती थी. एक दिन, वह भोजन की तलाश में जंगल में घूम रही थी कि उसे एक कुआं दिखाई दिया. कुआं गहरा था और पानी से भरा था. लोमड़ी कुएं में झांकने लगी और उसने देखा कि कुएं में एक बकरी खड़ी है.

लोमड़ी ने बकरी से कहा, “नमस्ते, बकरी बहन. तुम कुएं में क्या कर रही हो?”

बकरी ने कहा, “मैं पानी पीने के लिए कुएं में उतरी हूं.”

लोमड़ी ने कहा, “पानी बहुत मीठा है. तुम भी थोड़ा पी लो.”

बकरी ने कहा, “ठीक है.”

बकरी ने लोमड़ी की बात पर विश्वास किया और कुएं में उतर गई. जैसे ही बकरी कुएं में उतरी, लोमड़ी ने तुरंत कुएं से बाहर निकल कर भाग गई. बकरी कुएं में फंस गई.

बकरी बहुत रोई, लेकिन कोई उसकी मदद नहीं कर पाया. कुछ घंटों बाद, एक किसान कुएं के पास आया. उसने कुएं में बकरी को देखा और उसे बाहर निकाला. किसान ने बकरी को अपने घर ले गया और उसे खाना खिलाया. बकरी बहुत खुश थी. उसने किसान को धन्यवाद दिया और अपने घर वापस चली गई.

बकरी ने इस घटना से सीखा कि किसी के भी झांसे में नहीं आना चाहिए. उसे लोमड़ी की बात पर विश्वास नहीं करना चाहिए था. उसने यह भी सीखा कि किसी भी अजनबी पर भरोसा नहीं करना चाहिए.

Moral of the Story:- किसी के भी झांसे में नहीं आना चाहिए. किसी भी अजनबी पर भरोसा नहीं करना चाहिए. हमेशा सतर्क रहना चाहिए.

रानी और मंत्री (The Queen and the Minister Hindi Story)

एक बार की बात है, एक राज्य में एक बहुत ही दयालु और बुद्धिमान रानी हुआ करती थी। वह अपने राज्य के लोगों से बहुत प्यार करती थी और हमेशा उनकी भलाई के लिए सोचती थी। एक दिन, राज्य में एक बहुत बड़ा अकाल पड़ गया। लोग बहुत भूखे और तड़प रहे थे। रानी ने अपने मंत्री से कहा कि कुछ करना होगा ताकि लोगों को भूख से बचाया जा सके।

मंत्री ने कहा कि वह एक उपाय सोच रहा है। कुछ दिनों बाद, मंत्री ने रानी को बताया कि उसने एक उपाय सोचा है। उसने कहा कि वह एक तालाब का निर्माण करेगा और उसमें मछलियां भर देगा। लोग मछलियों को पकड़ कर अपनी भूख मिटा सकेंगे। रानी ने मंत्री की योजना को स्वीकार कर लिया और उन्होंने तालाब का निर्माण शुरू कर दिया।

कुछ ही दिनों में, तालाब का निर्माण पूरा हो गया और मंत्री ने उसमें मछलियां भर दी। लोग बहुत खुश हुए और उन्होंने तालाब से मछलियां पकड़ कर अपनी भूख मिटा ली। रानी बहुत खुश थी कि मंत्री ने लोगों की मदद की थी।

एक दिन, मंत्री को एक पत्र मिला जिसमें कहा गया था कि एक दुष्ट राजा अपने राज्य को जीतने के लिए आ रहा है। मंत्री ने रानी को पत्र दिखाया और कहा कि उन्हें दुष्ट राजा से लड़ना होगा। रानी ने कहा कि वह लड़ने के लिए तैयार है।

मंत्री ने रानी को एक सेना तैयार करने में मदद की। सेना तैयार होने के बाद, रानी ने दुष्ट राजा से लड़ाई लड़ी। रानी और उसकी सेना ने दुष्ट राजा को हराया और उसके राज्य को जीत लिया।

रानी और मंत्री ने मिलकर राज्य को खुशहाल और समृद्ध बनाया। लोगों ने उन्हें बहुत प्यार किया और वे हमेशा उनकी आभारी रहेंगे।

Moral of the Story:- एक अच्छा नेता वह होता है जो लोगों की परवाह करता है और हमेशा उनके कल्याण के बारे में सोचता है। आपके सामने आने वाली किसी भी चुनौती के लिए तैयार रहना महत्वपूर्ण है। टीम वर्क और सहयोग से कुछ भी संभव है।

एक सच्ची प्रेम कहानी (Hindi Story)

ज़िंदगी में कई तरह के प्यार होते हैं, लेकिन सबसे खूबसूरत होता है सच्चे दिल का प्यार। आज मैं आपको एक ऐसी ही सच्ची प्रेम कहानी सुनाने जा रहा हूँ, जो आपको भी दिल को छू लेगी।

एक बार की बात है, एक गांव में एक लड़की और लड़का रहते थे। दोनों एक ही स्कूल में पढ़ते थे और एक दूसरे को बहुत पसंद करते थे। लड़की का नाम मीना और लड़के का नाम रवि था।

मीना और रवि हर दिन एक साथ खेलते थे, पढ़ते थे और हँसते थे। दोनों के बीच बहुत गहरा प्यार था। लेकिन एक दिन, रवि के परिवार को दूसरे शहर में जाना पड़ा। रवि बहुत दुखी था, लेकिन वह मीना को नहीं बता सका क्योंकि वह नहीं चाहता था कि मीना भी दुखी हो।

रवि दूसरे शहर चला गया, लेकिन वह मीना को भूल नहीं पाया। वह हर दिन मीना के बारे में सोचता था और उसे याद करता था। मीना भी रवि को बहुत याद करती थी।

एक साल बाद, रवि वापस गांव आया। वह बहुत खुश था कि मीना से फिर से मिल सकेगा। मीना भी रवि को देखकर बहुत खुश हुई। दोनों ने एक दूसरे को गले लगाया और बहुत रोए।

रवि और मीना ने फिर से एक दूसरे से मिलना शुरू कर दिया। वे हर दिन एक साथ खेलते थे, पढ़ते थे और हँसते थे। उनका प्यार और भी गहरा हो गया।

कुछ साल बाद, रवि और मीना ने शादी कर ली। वे बहुत खुश थे और उन्होंने एक दूसरे से बहुत प्यार किया। उनकी शादी में गांव के सभी लोग शामिल हुए।

रवि और मीना की प्रेम कहानी एक सच्चे दिल के प्यार की कहानी है। यह कहानी हमें सिखाती है कि प्यार सबसे खूबसूरत एहसास है और यह कभी न खत्म होने वाला है।

सच्ची सुंदरता (Sachchi Sundarta Hindi Story)

एक बार की बात है, एक खूबसूरत राजकुमारी थी. वह बहुत ही सुंदर थी, और हर कोई उसे देखना चाहता था. लेकिन राजकुमारी बहुत ही स्वार्थी और अहंकारी भी थी. वह सोचती थी कि वह सबसे सुंदर है, और दूसरों की सुंदरता को नहीं देखती थी.

एक दिन, राजकुमारी जंगल में घूम रही थी, जब उसने एक गरीब लड़की को देखा. लड़की बहुत ही साधारण दिखती थी, लेकिन वह बहुत ही खुश थी. राजकुमारी को लड़की की खुशी देखकर बहुत अजीब लगा. वह सोचती थी कि अगर वह इतनी सुंदर नहीं होती, तो वह इतनी खुश नहीं होती.

राजकुमारी ने लड़की से बात की, और उसे पता चला कि लड़की बहुत ही दयालु और मददगार है. वह दूसरों की मदद करने में खुश होती है, और वह हमेशा दूसरों के बारे में सोचती है. राजकुमारी को लड़की की दयालुता देखकर बहुत प्रभावित हुई.

राजकुमारी ने उस दिन लड़की से बहुत कुछ सीखा. उसने सीखा कि सुंदरता सिर्फ बाहरी नहीं होती है. सुंदरता भीतर की होती है, और यह दयालुता, मददगार होने और दूसरों के बारे में सोचने में होती है.

राजकुमारी ने लड़की से सीखकर बहुत बदल गई. वह अब स्वार्थी और अहंकारी नहीं थी. वह अब दयालु और मददगार हो गई. वह दूसरों के बारे में सोचती है, और वह हमेशा दूसरों की मदद करने के लिए तैयार रहती है.

राजकुमारी की सुंदरता अब और भी अधिक बढ़ गई है. वह अब अंदर और बाहर से सुंदर है. वह अब हर किसी के लिए एक प्रेरणा है.

राजकुमारी की कहानी हमें सिखाती है कि सच्ची सुंदरता अंदर की होती है. यह दयालुता, मददगार होने और दूसरों के बारे में सोचने में होती है. अगर हम इन गुणों को विकसित करते हैं, तो हम भी अंदर और बाहर से सुंदर बन सकते हैं।

मेहनती और आलसी लड़की (Hindi Story)

एक समय की बात है, रश्मि और अनामिका नाम की दो बहनें थीं। रश्मि एक मेहनती लड़की थी जो हमेशा कड़ी मेहनत करती थी। वह घर के काम में अपनी माँ की मदद करती थी और अपने छोटे भाई-बहनों की देखभाल करती थी। दूसरी ओर, अनामिका एक आलसी लड़की थी जो कभी काम नहीं करना चाहती थी। वह हमेशा इधर-उधर पड़ी रहती और शिकायत करती रहती।

एक दिन उनकी मां ने उन्हें बताया कि वह बाजार जा रही हैं। उसने रश्मि को घर पर रहने और घर की देखभाल करने के लिए कहा, जबकि अनामिका को उसके साथ जाना था। रश्मि मदद करके खुश थी, लेकिन अनामिका नहीं। वह बाज़ार नहीं जाना चाहती थी, लेकिन वह जानती थी कि उसे अपनी माँ की बात माननी होगी।

बाज़ार में, उनकी माँ ने कुछ भोजन और अन्य सामान खरीदा। उसने अनामिका के लिए एक नई पोशाक भी खरीदी। अनामिका अपनी नई ड्रेस से बहुत खुश थी, लेकिन उसे थोड़ी शर्म भी आ रही थी. उसे एहसास हुआ कि वह आलसी थी, और रश्मि हमेशा कड़ी मेहनत कर रही थी।

जब वे घर पहुँचे, तो रश्मि ने किराने का सामान रखने में उनकी माँ की मदद की। फिर, वह अपने कमरे में चली गई और अपना होमवर्क करने लगी। अनामिका अपने कमरे में गई और अपनी नई पोशाक पहनने लगी। उसने दर्पण में देखा और सोचा कि वह कितनी सुंदर लग रही थी। लेकिन फिर, उसने रश्मि के बारे में सोचा और उसने कितनी मेहनत की थी। उसे फिर खुद पर शर्मिंदगी महसूस हुई।

अगले दिन, अनामिका ने अपना तरीका बदलने का फैसला किया। वह घर के काम में अपनी माँ की मदद करने लगी और अपने छोटे भाई-बहनों की देखभाल करने लगी। वह बिना पूछे अपना होमवर्क भी करने लगी। रश्मि को अपनी बहन पर बहुत गर्व था और उनकी माँ भी बहुत खुश थी।

कहानी का सार यह है कि कड़ी मेहनत का फल मिलता है। यदि आप मेहनती हैं और कड़ी मेहनत करते हैं, तो आप अपने लक्ष्य हासिल कर लेंगे। और यदि आप गलतियाँ भी करते हैं, तो आप हमेशा उनसे सीख सकते हैं और सुधार कर सकते हैं।

निष्कर्ष

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