परियों की कहानियाँ: प्रेरणादायक संदेशों से भरी रोचक कहानियाँ | Pariyon ki Kahani in Hindi

Pariyon ki Kahani in Hindi: परियों की कहानियाँ सदियों से बच्चों और बड़ों को समान रूप से मोहित करती रही हैं। ये कहानियाँ अक्सर जादुई दुनियाओं, अद्भुत जीवों और अविश्वसनीय कारनामों में स्थापित होती हैं। वे हमें अच्छाई बनाम बुराई, प्रेम और त्याग, और साहस और दृढ़ संकल्प के बारे में सिखाते हैं।

परियों की कहानियाँ (Pariyon ki Kahani in Hindi)

परियों की कहानियाँ दुनिया भर की संस्कृतियों में पाई जाती हैं। भारत में, परियों की कहानियों को “परी कथाएँ” कहा जाता है। ये कहानियाँ अक्सर लोककथाओं और किंवदंतियों पर आधारित होती हैं, और वे अक्सर नैतिकता और जीवन के सबक सिखाती हैं।

सिंड्रेला: परियों की कहानी

एक बार की बात है, एक खूबसूरत लड़की थी जिसका नाम सिंड्रेला था। वह अपने पिता और माँ के साथ एक भव्य घर में रहती थी। सिंड्रेला के माता-पिता बहुत दयालु थे, और वे उसे बहुत प्यार करते थे। लेकिन एक दुखद दिन, सिंड्रेला की माँ की मृत्यु हो गई। कुछ समय बाद, सिंड्रेला के पिता ने एक दूसरी महिला से शादी की। सिंड्रेला की सौतेली माँ और दो सौतेली बहनें बहुत क्रूर थीं। उन्होंने सिंड्रेला को घर में नौकरानी की तरह काम करने पर मजबूर किया।

सिंड्रेला को बहुत दुख होता था, लेकिन वह हार नहीं मानती थी। वह हमेशा दयालु और मेहनती बनी रहती थी। एक दिन, राजकुमार ने एक गेंद का आयोजन किया। सभी लड़कियों को गेंद में आमंत्रित किया गया था। सिंड्रेला भी जाना चाहती थी, लेकिन उसकी सौतेली माँ और बहनों ने उसे जाने से मना कर दिया।

सिंड्रेला बहुत दुखी थी। वह रोने लगी। तभी, एक परी प्रकट हुई। परी ने सिंड्रेला को एक जादुई गाउन, जूते और एक गहने का सेट दिया। परी ने सिंड्रेला को कहा कि वह गेंद में जा सकती है, लेकिन उसे आधी रात से पहले वापस आना होगा।

सिंड्रेला गेंद में गई। वह बहुत सुंदर लग रही थी। राजकुमार को सिंड्रेला से प्यार हो गया। उन्होंने पूरी रात साथ में नृत्य किया। आधी रात के करीब, सिंड्रेला को याद आया कि उसे वापस जाना होगा। वह जल्दी से राजकुमार से विदाई लेती हुई भाग गई। भागते समय, उसका एक जूता खो गया।

राजकुमार ने सिंड्रेला का जूता उठा लिया। उसने कहा कि वह उस लड़की से शादी करेगा जो इस जूते में फिट बैठती है। अगले दिन, राजकुमार सिंड्रेला के घर आया। उसने सभी लड़कियों को जूता पहनाने के लिए कहा। सिंड्रेला की सौतेली माँ और बहनों ने जूता पहनने की कोशिश की, लेकिन उनमें से कोई भी जूते में फिट नहीं बैठता था।

अंत में, सिंड्रेला ने जूता पहना। जूता उसके पैर में बिल्कुल फिट बैठता था। राजकुमार और सिंड्रेला की शादी हो गई। वे खुशी-खुशी रहने लगे।

नैतिकता: दयालु और मेहनती बनो। कभी भी हार मत मानो। आपके सपने सच हो सकते हैं।

स्नो व्हाइट और सात बौने की कहानी

एक बार की बात है, एक दूर के राज्य में, एक सुंदर रानी रहती थी। एक सर्दियों के दिन, वह खिड़की के पास बैठी सिलाई कर रही थी। अचानक, उसकी उंगली में सुई चुभ गई और खून की एक बूंद बर्फ पर गिर गई। रानी ने बर्फ पर खून की बूंद को देखा और सोचा, “काश मेरी एक बेटी होती जिसकी त्वचा बर्फ की तरह सफेद, होंठ खून की तरह लाल और बाल काले लकड़ी की तरह होते।”

कुछ महीने बाद, रानी की एक बेटी हुई। बेटी बिल्कुल वैसी ही थी जैसी रानी ने कल्पना की थी। उन्होंने उसका नाम स्नो व्हाइट रखा। रानी की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। लेकिन, कुछ ही समय बाद, रानी की मृत्यु हो गई। राजा बहुत दुखी हुआ। कुछ समय बाद, उसने एक और रानी से शादी कर ली। नई रानी बहुत सुंदर थी, लेकिन वह बहुत ही ईर्ष्यालु भी थी। उसे स्नो व्हाइट की सुंदरता से जलन होने लगी।

उस जादूगरनी रानी के पास एक जादुई आईना था। जिससे वो कोई भी सवाल पूछकर उस जादुई आईने से अपने जवाब जान जाती थी। एक दिन, रानी ने अपने जादुई आईने के सामने आई और आईने से पूछा कि, “इस दुनिया में सबसे सुंदर औरत कौन है?” आईने ने जवाब दिया, “आप दुनिया में सबसे सुंदर हैं, लेकिन स्नो व्हाइट आपसे भी ज्यादा सुंदर है।”

यह सुनकर रानी क्रोधित हो गई। उसने एक शिकारी को बुलाया और उसे आदेश दिया कि वह स्नो व्हाइट को जंगल में ले जाकर मार डाले। शिकारी स्नो व्हाइट को जंगल में ले गया, लेकिन उसे मारने का साहस नहीं हुआ। उसने स्नो व्हाइट को जंगल में छोड़ दिया और रानी को झूठ बोलकर बताया कि उसने उसे मार दिया है।

स्नो व्हाइट जंगल में भटकती रही। थोड़ी देर बाद, उसे एक छोटा सा घर दिखाई दिया। उसने घर में प्रवेश किया और देखा कि वहाँ कोई नहीं है। घर में सात छोटे बिस्तर थे। स्नो व्हाइट थकी हुई थी, इसलिए वह एक बिस्तर पर लेट गई और सो गई।

थोड़ी देर बाद, सात बौने घर लौटे। वे खदान में काम करके थके हुए थे। उन्होंने स्नो व्हाइट को देखा और हैरान रह गए। उन्होंने स्नो व्हाइट से पूछा कि वह कौन है और यहाँ क्या कर रही है। स्नो व्हाइट ने उन्हें अपनी पूरी कहानी सुनाई।

बौनों को स्नो व्हाइट पर दया आ गई। उन्होंने उसे अपने घर में रहने की अनुमति दी। स्नो व्हाइट ने घर की सफाई की और बौनों के लिए खाना बनाया। बौने स्नो व्हाइट से बहुत खुश थे।

एक दिन, रानी को पता चला कि स्नो व्हाइट अभी भी जीवित है। वह बहुत क्रोधित हुई। उसने एक जहरीला सेब बनाया और उसे एक बूढ़ी औरत के रूप में बदलकर स्नो व्हाइट के घर भेजा।

बूढ़ी औरत ने स्नो व्हाइट को सेब दिया। स्नो व्हाइट ने सेब का एक टुकड़ा खाते ही बेहोश हो गई। बौने घर लौटे और स्नो व्हाइट को बेहोश पड़ा देखकर बहुत दुखी हुए।

तभी, एक राजकुमार घोड़े पर सवार होकर वहाँ आया। उसने स्नो व्हाइट को देखा और उसकी सुंदरता से मोहित हो गया। उसने स्नो व्हाइट को चूमा। जैसे ही राजकुमार ने स्नो व्हाइट को चूमा, स्नो व्हाइट की नींद खुल गई।

राजकुमार और स्नो व्हाइट एक दूसरे से प्यार करने लगे। उन्होंने शादी कर ली और खुशी-खुशी रहने लगे। दुष्ट रानी को उसकी बुराई के लिए सजा दी गई थी। उसे जंगल में निर्वासित कर दिया गया, और उसे कभी भी स्नो व्हाइट या बौनों को फिर से देखने की अनुमति नहीं दी गई थी।

नैतिकता: सौंदर्य क्षणभंगुर है, लेकिन दया और अच्छाई हमेशा के लिए रहती है।

यह कहानी हमें सिखाती है कि हमें कभी भी ईर्ष्या या घृणा नहीं करनी चाहिए। हमें दूसरों के प्रति दयालु और दयालु होना चाहिए, भले ही वे हमसे अलग हों।

यह कहानी हमें यह भी सिखाती है कि हमें कभी भी हार नहीं माननी चाहिए। चाहे हम कितनी भी मुश्किल परिस्थिति में क्यों न हों, हमेशा आशा होती है।

सुंदरी और वनदेव की कहानी

एक जंगल के किनारे बसा था एक छोटा सा गांव. वहां रहती थी सुमन, जिसकी खूबसूरती दूर-दूर तक मशहूर थी. लेकिन उससे भी ज्यादा मशहूर थी उसकी दयालुता. गांव के बुजुर्ग उसे “परी” कहकर पुकारते थे. एक दिन, गांव में भयंकर अकाल पड़ा. फसलें सूख गईं और भूखमरी का साया गांव पर मंडराने लगा.

सुमन के पिता, एक बुढ़े किसान, ने जंगल में खाने की तलाश करते हुए रास्ता भटक गए. घंटों भटकने के बाद, उन्हें एक भव्य महल नजर आया. महल के चारों ओर हरे-भरे पेड़-पौधे लहलहा रहे थे और फल-फूलों से भरपूर थे. भूख से व्याकुल किसान महल के अंदर चला गया. वहां उसे लजीज भोजन से सजी मेज दिखाई दी. उसकी भूख बहुत तेज थी, इसलिए उसने एक रोटी उठाकर खा ली.

अचानक, एक गहरी आवाज गूंजी, “मेरे महल में चोरी करने की हिम्मत!”

किसान घबराकर पीछे मुड़ा. वहां उसने एक विशाल वनदेव को देखा. उसके बदन पर घने बाल उगे हुए थे और उसकी आंखें चमक रहीं थीं. लेकिन किसान को उसमें क्रूरता नहीं, बल्कि गहरे दुख का आभास हुआ.

किसान ने घबराते हुए बताया कि वह भटक गया था और भूख से व्याकुल था. उसने वनदेव से माफी मांगी और बताया कि गांव में अकाल पड़ा है. वनदेव ने कुछ देर सोचने के बाद कहा, “मैं तुम्हें फल दूंगा, लेकिन बदले में तुम्हें अपनी सबसे प्यारी चीज देनी होगी.”

किसान जानता था कि उसकी सबसे प्यारी चीज उसकी बेटी सुमन है. लेकिन गांव को बचाने के लिए, वह तैयार हो गया. वह दुखी मन से गांव लौट आया और सुमन को सब कुछ बताया. सुमन अपने पिता के बलिदान को देखकर बहुत प्रभावित हुई. उसने कहा, “पिताजी, आप चिंता न करें. मैं वनदेव के पास जाऊंगी.”

सुमन अगले दिन सुबह जल्दी उठी और वनदेव के महल की ओर चल पड़ी. रास्ते में उसे जंगली जानवर मिले, लेकिन वे सुमन के दयालु स्वभाव को भांपकर उसे कोई नुकसान नहीं पहुंचाए. अंततः वह महल तक पहुंच गई.

वनदेव उसे देखकर चौंक गया. उसने पूछा, “तुम यहां क्यों आई हो, सुमन?”

सुमन ने बताया कि वह अपने पिता के वादे को पूरा करने आई है. वनदेव ने उसे महल में रहने का प्रस्ताव दिया. सुमन वहां रहने के लिए तैयार हो गई.

महल में रहते हुए, सुमन ने देखा कि वनदेव अकेला है और हमेशा उदास रहता है. वह उससे बातें करती, उसके लिए गाती और उसे जंगल के बारे में कहानियां सुनाती. धीरे-धीरे वनदेव सुमन से जुड़ने लगा. वह सुमन की दयालुता और बुद्धिमत्ता से प्रभावित हुआ.

एक शाम, सुमन ने वनदेव को उदास देखकर पूछा, “आप इतने दुखी क्यों हैं?”

वनदेव ने बताया कि कई साल पहले एक शक्तिशाली जादूगरनी ने उस पर श्राप दिया था. श्राप के कारण वह एक भयानक जीव में बदल गया था और महल से बाहर नहीं निकल सकता था. श्राप को तोड़ने का केवल एक ही उपाय था – सच्चा प्यार.

सुमन ने वनदेव को समझाया कि वह उसका सच्चा मित्र है और उसकी परवाह करती है. उसी क्षण, महल में एक तेज रोशनी फैली. वनदेव का शरीर चमकने लगा और धीरे-धीरे वह एक सुंदर राजकुमार में बदल गया. श्राप टूट चुका था. उन्होंने शादी कर ली और खुशी-खुशी रहने लगे।

छोटी सी जलपरी की कहानी

समुद्र की गहराई में, एक भव्य महल में, जलपरियों का एक राजा रहता था। राजा के छह सुंदरियां थीं, और सबसे छोटी सबसे सुंदर थी। उसकी लंबी, बहती हुई हरी बाल, चमकीले नीले रंग की आँखें और एक मधुर आवाज थी।

छोटी जलपरी को इंसानों की दुनिया में बहुत दिलचस्पी थी। वह अक्सर समुद्र की सतह पर तैरती और जहाजों को देखती। वह इंसानों के बारे में कहानियाँ सुनना भी पसंद करती थी।

एक दिन, छोटी जलपरी एक जहाज पर एक सुंदर राजकुमार को देखती है। वह तुरंत उससे प्यार कर पड़ती है। जब जहाज एक तूफान में फंस जाता है, तो छोटी जलपरी राजकुमार की जान बचाती है।

राजकुमार छोटी जलपरी की सुंदरता और दया से मोहित हो जाता है। वह उसे जानना चाहता है, लेकिन वह उसे अपनी आवाज नहीं दे सकती। वह जानती है कि अगर वह अपनी आवाज खो देगी, तो वह इंसान नहीं बन पाएगी।

छोटी जलपरी अपनी आवाज को छोड़ने और इंसान बनने के लिए दृढ़ है। वह समुद्र की चुड़ैल के पास जाती है, जो उसे एक जादुई औषधि देती है। औषधि उसकी आवाज को छीन लेती है, लेकिन उसे पैर देती है।

छोटी जलपरी राजकुमार के पास जाती है और उसे अपनी कहानी बताती है। राजकुमार उसे अपने महल में रहने के लिए आमंत्रित करता है। वे प्यार में पड़ जाते हैं, लेकिन राजकुमार किसी और से शादी करने का वादा करता है।

छोटी जलपरी का दिल टूट जाता है। वह जानती है कि अगर राजकुमार ने तीन दिनों के भीतर उसे चूमा नहीं, तो वह मर जाएगी।तीसरे दिन, राजकुमार अपनी दुल्हन के साथ शादी करने वाला होता है। छोटी जलपरी उसे रोकने की कोशिश करती है, लेकिन वह असफल रहती है।

छोटी जलपरी समुद्र में वापस जाती है और मरने की तैयारी करती है। लेकिन तभी, उसे एक विचार आता है। वह अपनी पूंछ वापस पाने के लिए समुद्र की चुड़ैल के पास जाती है।

चुड़ैल छोटी जलपरी को उसकी पूंछ वापस देने के लिए सहमत होती है, लेकिन बदले में वह उसकी आत्मा मांगती है। छोटी जलपरी सहमत हो जाती है।

छोटी जलपरी समुद्र में वापस जाती है और राजकुमार को चूमती है। राजकुमार उसे पहचान लेता है और उसे चूमता है। छोटी जलपरी का प्यार राजकुमार के दिल को पिघला देता है। वह उसे अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार करता है। छोटी जलपरी और राजकुमार खुशी-खुशी रहते हैं।

नैतिकता: प्यार सभी बाधाओं को पार कर सकता है।

सुंदरी और नींद्रा की कहानी

एक बार की बात है, एक राजा और रानी थे जिनकी एक बेटी थी। राजकुमारी बहुत सुंदर थी और उसके माता-पिता उससे बहुत प्यार करते थे। जब वह पैदा हुई, तो राजा ने एक भव्य दावत का आयोजन किया और राज्य के सभी परियों को आमंत्रित किया।

सभी परियों बहुत खुश थीं और उन्होंने राजकुमारी को कई उपहार दिए। एक परी ने उसे सुंदरता का उपहार दिया, दूसरी ने उसे दया का उपहार दिया, और तीसरी ने उसे बुद्धि का उपहार दिया।

लेकिन तभी, एक दुष्ट परी ने कमरे में प्रवेश किया। वह राजकुमारी से ईर्ष्या करती थी और उसे शाप देना चाहती थी। उसने कहा, “जब राजकुमारी सोलह वर्ष की होगी, तो वह एक सुई से चुभ जाएगी और मर जाएगी।” यह सुनकर सभी बहुत दुखी हुए। राजा ने परी से विनती की कि वह अपना शाप वापस ले ले, लेकिन परी ने मना कर दिया। उसने कहा, “मैं अपना शाप वापस नहीं ले सकती, लेकिन मैं इसे बदल सकती हूँ। राजकुमारी सोलह साल की उम्र में नहीं मरेगी, बल्कि वह सौ साल तक सो जाएगी।”

राजा को यह थोड़ी राहत मिली, लेकिन वह अभी भी बहुत दुखी था। उसने अपनी बेटी को शाप से बचाने के लिए हर संभव कोशिश करने का फैसला किया। जब राजकुमारी सोलह साल की हुई, तो राजा ने राज्य में सभी सुइयों को इकट्ठा करवाया और उन्हें जला दिया। उसने महल में भी सभी सुइयों को छिपा दिया।

लेकिन एक दिन, राजकुमारी एक कमरे में अकेली थी। उसे एक सुई मिली और वह उससे खेलने लगी। तभी, वह गलती से सुई से चुभ गई। जैसे ही राजकुमारी सुई से चुभी, वह तुरंत सो गई। राजा और रानी बहुत दुखी हुए। उन्होंने अपनी बेटी को जगाने की हर संभव कोशिश की, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।

अंत में, राजा ने महल के सभी दरवाजे और खिड़कियां बंद कर दीं। उसने राजकुमारी को एक बिस्तर पर लिटा दिया और उसके चारों ओर एक जादूई घेरा बना दिया। सौ साल बाद, एक राजकुमार महल में आया। वह राजकुमारी को देखकर उसकी सुंदरता पर मोहित हो गया। उस राजकुमार ने राजकुमारी के माथे को चूमा और राजकुमार के चूमने से राजकुमारी नींद से जाग गई। राजा ने राजकुमारी और राजकुमार की शादी करवा दी। और राजकुमार और राजकुमारी हमेशा के लिए साथ रहकर खुशी-खुशी जीवन जीने लगे।

नैतिक शिक्षा: बुराई पर अच्छाई की हमेशा जीत होती है। सच्चा प्यार सभी बाधाओं को पार कर सकता है।

अंगूठी रानी की कहानी

एक घने जंगल के बीच, एक छोटे से गांव में, एक गरीब लकड़हारा अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ रहता था। लकड़हारा बहुत मेहनती था, लेकिन उसके पास बहुत कम पैसा था। एक दिन, लकड़हारा जंगल में लकड़ी काट रहा था, तभी उसे एक चमकदार अंगूठी मिली। उसने अंगूठी उठाई और उसे अपनी उंगली में पहन लिया।

अचानक, लकड़हारे के सामने एक सुंदर परी प्रकट हुई। परी ने कहा, “मैं अंगूठी रानी हूँ। यह अंगूठी तुम्हें तीन इच्छाएँ प्रदान करेगी।” लकड़हारा बहुत खुश हुआ। उसने सोचा कि अब वह अपनी गरीबी से मुक्ति पा सकता है।

लकड़हारे ने अपनी पहली इच्छा व्यक्त की, “मैं चाहता हूँ कि मेरे पास एक बड़ा और सुंदर घर हो।” अंगूठी रानी ने अपनी जादुई छड़ी लहराई और लकड़हारे के सामने एक बड़ा और सुंदर घर बन गया।

लकड़हारे ने अपनी दूसरी इच्छा व्यक्त की, “मैं चाहता हूँ कि मेरे पास बहुत सारा पैसा हो।” अंगूठी रानी ने फिर से अपनी जादुई छड़ी लहराई और लकड़हारे के पास बहुत सारा पैसा आ गया।

लकड़हारा अपनी तीसरी इच्छा व्यक्त करने वाला था, तभी उसकी पत्नी वहाँ आ गई। लकड़हारी की पत्नी बहुत लालची थी। उसने लकड़हारे से कहा, “तुम्हारी तीसरी इच्छा यह होनी चाहिए कि मैं दुनिया की सबसे शक्तिशाली महिला बन जाऊँ।”

लकड़हारा अपनी पत्नी की बात से सहमत हो गया। उसने अपनी तीसरी इच्छा व्यक्त की, “मैं चाहता हूँ कि मेरी पत्नी दुनिया की सबसे शक्तिशाली महिला बन जाये।”

अंगूठी रानी ने अपनी जादुई छड़ी लहराई और लकड़हारी की पत्नी दुनिया की सबसे शक्तिशाली महिला बन गई।

लकड़हारा और उसकी पत्नी अपने नए घर में रहने लगे। लकड़हारी की पत्नी अपनी शक्ति का इस्तेमाल लोगों पर अत्याचार करने लगी। वह लोगों से उनकी संपत्ति छीन लेती थी और उन्हें अपने गुलाम बना लेती थी।

लकड़हारा अपनी पत्नी के कार्यों से बहुत दुखी था। उसने अपनी पत्नी से कहा, “तुम गलत काम कर रही हो। तुम्हें अपनी शक्ति का इस्तेमाल लोगों की मदद करने के लिए करना चाहिए।”

लेकिन लकड़हारी की पत्नी ने उसकी बात नहीं मानी। वह अपनी शक्ति का इस्तेमाल लोगों पर अत्याचार करने में लगी रही।

एक दिन, लकड़हारा जंगल में लकड़ी काट रहा था, तभी उसे अंगूठी रानी फिर से मिली। अंगूठी रानी ने लकड़हारे से कहा, “तुम्हारी पत्नी अपनी शक्ति का गलत इस्तेमाल कर रही है। तुम्हें उसे रोकना होगा।”

लकड़हारा घर वापस गया और अपनी पत्नी से कहा, “तुम्हें अपनी शक्ति का इस्तेमाल लोगों की मदद करने के लिए करना चाहिए। यदि तुमने ऐसा नहीं किया, तो मैं तुम्हें छोड़ दूंगा।”

लकड़हारी की पत्नी उसकी बात से डर गई। उसने अपनी गलती स्वीकार की और लोगों से क्षमा मांगी। उसने अपनी शक्ति का इस्तेमाल लोगों की मदद करने के लिए करना शुरू कर दिया।

लकड़हारा और उसकी पत्नी खुशी-खुशी रहने लगे। उन्होंने अपनी शक्ति का इस्तेमाल लोगों की मदद करने के लिए किया और सभी का प्यार और सम्मान प्राप्त किया।

नैतिकता: शक्ति का इस्तेमाल दूसरों की मदद करने के लिए करना चाहिए। लालच और अत्याचार का अंत हमेशा बुरा होता है।

कुरूप हंस की कहानी

एक जंगल के बीचों बीच, एक खूबसूरत झील के किनारे, एक बड़े से कमल के पत्ते पर एक बत्तख की माँ अपने अंडों को सेने में व्यस्त थी. दिन बीते और अंडों से एक-एक कर के छोटे-छोटे, पीले रंग के, प्यारे से बच्चे बाहर निकलने लगे. चारों तरफ खुशी का माहौल था, बत्तख के बच्चे आपस में बातें कर रहे थे और झील में तैरने की जल्दी कर रहे थे.

लेकिन एक अंडा था, जो अभी तक नहीं फूटा था. माँ बत्तख परेशान होने लगी. आखिरकार, काफी देर बाद अंडा टूटा और उसमें से एक बत्तख का बच्चा बाहर निकला. वह बाकी बच्चों से बिल्कुल अलग दिखता था. उसका रंग भूरा था, गर्दन लंबी थी और टांगे टेढ़ी-मेढ़ी थीं.

बत्तख के बाकी बच्चों ने उसे घूरना शुरू कर दिया. “यह तो कितना बदसूरत है!” एक बच्चा बोला. “हाँ, यह हमारे साथ नहीं रह सकता,” दूसरा बोला. माँ बत्तख को बहुत बुरा लगा, लेकिन वह अपने सभी बच्चों से प्यार करती थी. उसने उन्हें समझाया कि दिखावट मायने नहीं रखती, दिल का अच्छा होना सबसे ज्यादा जरूरी है.

लेकिन बाकी बत्तख के बच्चे उसे हर जगह परेशान करते. वे उसे “भोंडा बत्तख” कहकर चिढ़ाते. जल्द ही, पूरे जंगल में ये बात फैल गई. दूसरे जानवर भी उसे चिढ़ाने लगे. वह कहाँ जाता, सब उसे तंग करते. उदास होकर, भोंडा बत्तख अकेले रहने लगा. वह जंगल के एक कोने में छिपकर रहता और बाकी बत्तखों को खुशी से तैरते हुए देखता.

एक दिन, जंगल में बहुत तेज बारिश हुई. नदी उफान पर आ गई और झील का किनारा टूट गया. बत्तख के बच्चे पानी के तेज बहाव में फंस गए. वे चीख-पुकार मचाने लगे. माँ बत्तख उन्हें बचाने की बहुत कोशिश कर रही थी, लेकिन वह अकेली थी.

दूर से भोंडा बत्तख यह सब देख रहा था. उसे पता था कि उसे कुछ करना है. वह अपनी हिम्मत जुटाकर पानी में कूद पड़ा. उसका लंबा गला और बड़ी टांगें अब उसके फायदे में काम आईं. वह तेजी से तैरकर उन बच्चों तक पहुंचा, जिन्हें पानी का बहाव दूर ले जा रहा था. एक-एक करके उसने उन्हें किनारे तक खींच लिया.

जब आखिरकार बारिश रुकी और पानी शांत हुआ, तो सभी बत्तख के बच्चे सुरक्षित किनारे पर खड़े थे. माँ बत्तख अपने बच्चों को गले लगाकर रो पड़ी. उसने भोंडे बत्तख को देखा, जो थका हुआ, लेकिन खुश नजर आ रहा था.

उस दिन से, किसी ने भी भोंडे बत्तख को नहीं चिढ़ाया. सबने माना कि वह सबसे बहादुर बत्तख है. धीरे-धीरे, भोंडा बत्तख बड़ा हुआ और एक खूबसूरत हंस बन गया. उसका सारा भूरा रंग सफेद हो गया, उसकी गर्दन और ज्यादा लंबी हो गई और उसकी टांगें मजबूत हो गईं. अब वह जंगल का सबसे सुंदर हंस था.

यह कहानी हमें सिखाती है कि असली खूबसूरती दिल की होती है. दिखावट कभी भी किसी की क्षमता को नहीं बताती. हमें हमेशा दूसरों की मदद करनी चाहिए, चाहे वे कैसे भी दिखते हों.

निष्कर्ष

परियों की कहानियाँ सदियों से बच्चों और बड़ों को समान रूप से मोहित करती रही हैं। वे हमें अच्छाई बनाम बुराई, प्रेम और त्याग, और साहस और दृढ़ संकल्प के बारे में सिखाते हैं। वे बच्चों के विकास के लिए कई लाभ प्रदान करते हैं, और वे दुनिया भर में बच्चों और बड़ों द्वारा समान रूप से प्यार किए जाते हैं।

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